डॉगी की टांग v/s इंसान की टांग
++++------++++-------++
घर से 'मॉर्निंग वॉक' के लिए बाहर निकला ही था कि कुत्--(सॉरी सॉरी), "डॉगी साहब " पीछे पड़ गए । उनके तेवर देख कर मैं डर गया और उनको भगाने के लिए एक पत्थर उठा लिया । पत्थर उनकी तरफ फेंकना ही वाला था कि एक विचार मन में उठा कि-- है मानव, यह तू क्या कर रहा है ? यदि तुम्हारे फेंके हुए पत्थर से उन की टांग टूट गई या सिर्फ एक दांत ही टूट गया तो, एक बड़ी न्यूज़ बन जाएगी और पूरे देश में हाहाकार मच जाएगा । इसके उलट यदि तुम्हें मात्र काटे ही नहीं , बल्कि फफेड़ भी दिया तो ,कुछ नहीं होने वाला । देखा नहीं, आंध्र के 25 इंजीनियरिंग छात्र एक बांध का पानी अचानक छोड़ने से बह गए थे ;ट्रेन की बोगी में आग लगाकर सैकड़ों लोगों को जला दिया था और ऐसे ही, सैकड़ो नहीं हजारों लोगों की जान चली गई लेकिन देश चुपचाप साेता रहा । विचार भंग हुआ और मैंने सामने देखा तो,वो साहब अपनी जीभ लपलपा रहे थे ,अब तो और भी डर लगा । शायद ये साहब मेरे स्वादिष्ट मांस को चखना चाहते हैं । मैं एक बार फिर पत्थर उनकी ओर फेंकने ही वाला था कि सलमान खान का चेहरा सामने आ गया जो इंसानों की मौत से बरी हो गए लेकिन हिरण की आत्मा है कि उसका पीछा नहीं छोड़ रही । इस विचार के आते ही मैने आंखें बंद कर ली और सोचा कि काटना होगा तो काट लेगा, ज्यादा से ज्यादा 14 इंजेक्शन ही तो लगेंगे,या फिर नकली पैर लगवाना पड़ेगा,लगवा लेंगे। थोड़ी देर कोई हलचल नहीं हुई और आंखें खोली तो देखा कि वे श्रीमानजी गुब्बारे वाले के पीछे पीछे , वही तेवर दिखाते हुए चले जा रहे हैं । मैंने चैन की सांस ली और ---
"जान बची और लाखों पाये,
लौट के एस के गुप्ता घर को आये" ।
++++------++++-------++
घर से 'मॉर्निंग वॉक' के लिए बाहर निकला ही था कि कुत्--(सॉरी सॉरी), "डॉगी साहब " पीछे पड़ गए । उनके तेवर देख कर मैं डर गया और उनको भगाने के लिए एक पत्थर उठा लिया । पत्थर उनकी तरफ फेंकना ही वाला था कि एक विचार मन में उठा कि-- है मानव, यह तू क्या कर रहा है ? यदि तुम्हारे फेंके हुए पत्थर से उन की टांग टूट गई या सिर्फ एक दांत ही टूट गया तो, एक बड़ी न्यूज़ बन जाएगी और पूरे देश में हाहाकार मच जाएगा । इसके उलट यदि तुम्हें मात्र काटे ही नहीं , बल्कि फफेड़ भी दिया तो ,कुछ नहीं होने वाला । देखा नहीं, आंध्र के 25 इंजीनियरिंग छात्र एक बांध का पानी अचानक छोड़ने से बह गए थे ;ट्रेन की बोगी में आग लगाकर सैकड़ों लोगों को जला दिया था और ऐसे ही, सैकड़ो नहीं हजारों लोगों की जान चली गई लेकिन देश चुपचाप साेता रहा । विचार भंग हुआ और मैंने सामने देखा तो,वो साहब अपनी जीभ लपलपा रहे थे ,अब तो और भी डर लगा । शायद ये साहब मेरे स्वादिष्ट मांस को चखना चाहते हैं । मैं एक बार फिर पत्थर उनकी ओर फेंकने ही वाला था कि सलमान खान का चेहरा सामने आ गया जो इंसानों की मौत से बरी हो गए लेकिन हिरण की आत्मा है कि उसका पीछा नहीं छोड़ रही । इस विचार के आते ही मैने आंखें बंद कर ली और सोचा कि काटना होगा तो काट लेगा, ज्यादा से ज्यादा 14 इंजेक्शन ही तो लगेंगे,या फिर नकली पैर लगवाना पड़ेगा,लगवा लेंगे। थोड़ी देर कोई हलचल नहीं हुई और आंखें खोली तो देखा कि वे श्रीमानजी गुब्बारे वाले के पीछे पीछे , वही तेवर दिखाते हुए चले जा रहे हैं । मैंने चैन की सांस ली और ---
"जान बची और लाखों पाये,
लौट के एस के गुप्ता घर को आये" ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें