शनिवार, 15 अगस्त 2020

 स्वतंत्रता दिवस की सभी मित्रोँ को शुभकामनाएँ ।

खुशी तो हेै ही लेकिन साथ मेँ दिल में कुछ कसक भी । इसी संदर्भ मे प्रस्तुत हेै, मेरी एक कविता । (for more--visit my blog. anjaanrah.blogspot.in)


फिर पन्द्रह अगस्त मनाओ

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लो फिर आया  स्वतंत्रता का एहसास दिलाने 

अगस्त का पन्द्रहवा दिवस 

पर मानव मन मेरा पुलकित हुआ नहीं 

कुछ उफनती सी कुछ अनदेखी सी 

उभरती रही सिसक। 

आकांक्षाये सब मर मिटी 

स्वप्न सब फूल से झर गए 

पंछी का मुक्त आकाश में 

विचरण करना अब संभव नहीं 

क्योंकि समय की तेज धार से 

उसके पंख कट गए। 

आओ तुम मेरे साथ आओ 

शंख ध्वनि ध्वनि करो ,अलख जगाओ 

मानव के सुशुप्त मन में चेतना जगाओ 

 और फिर पन्द्रह अगस्त मनाओ।


 सतीश कुमार गुप्ता ,'पोरवाल'


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