मैं तो गया था ,आंध्रा से ,हिमाचल के खूबसूरत नज़ारे देखने ,अपने मित्रों के साथ। मुझे नहीं मालूम था कि इन खूबसूरत नजारों को केमरे में उतारने का समय ही मेरा आखिरी समय हो जावेगा।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है ,अनेकों बार हो चुका है।कभी पुल पार करते समय ,कभी नदी के पेटे में पिकनिक मनाते समय अचानक पानी का सैलाब आया ,और कई उसके साथ बह कर ,काल में समा गए ।
यदि बरसात की वजह से बाढ़ आ जाये ,तो इसे ईश्वरीय प्रकोप मान कर स्वीकार किया जा सकता है ,किन्तु यदि मानवीय कारण से ऐसा होता है ,तो इसे माफ़ नहीं किया जा सकता। मालूम नहीं अब तक ऐसा क्यों होता आया है। ऐसी क्या मजबूरी थी, कि बांध से ६ से ७ फुट पानी एक साथ छोड़ा गया।क्या कोई आफत आ गई थी या गिन्नीज़ बुक में नाम दर्ज करवाना था। इस कंप्यूटर युग में क्या ऐसा नहीं हो सकता कि १ -१ फुट पानी १ या २ घंटे के अंतराल में छोड़ा जाये। क्या मंत्री से लेकर इंजीनियर तक ,किसी के पास ऐसा कोई हल नहीं है।
इंजीनियर बनते बनते मैं आत्मा हो गया हूँ। इस आत्मा की आवाज क्या कोई सुनेगा।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है ,अनेकों बार हो चुका है।कभी पुल पार करते समय ,कभी नदी के पेटे में पिकनिक मनाते समय अचानक पानी का सैलाब आया ,और कई उसके साथ बह कर ,काल में समा गए ।
यदि बरसात की वजह से बाढ़ आ जाये ,तो इसे ईश्वरीय प्रकोप मान कर स्वीकार किया जा सकता है ,किन्तु यदि मानवीय कारण से ऐसा होता है ,तो इसे माफ़ नहीं किया जा सकता। मालूम नहीं अब तक ऐसा क्यों होता आया है। ऐसी क्या मजबूरी थी, कि बांध से ६ से ७ फुट पानी एक साथ छोड़ा गया।क्या कोई आफत आ गई थी या गिन्नीज़ बुक में नाम दर्ज करवाना था। इस कंप्यूटर युग में क्या ऐसा नहीं हो सकता कि १ -१ फुट पानी १ या २ घंटे के अंतराल में छोड़ा जाये। क्या मंत्री से लेकर इंजीनियर तक ,किसी के पास ऐसा कोई हल नहीं है।
इंजीनियर बनते बनते मैं आत्मा हो गया हूँ। इस आत्मा की आवाज क्या कोई सुनेगा।
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