मंगलवार, 1 मार्च 2022

मेरी आवाज



*मेरी आवाज* 


  मेरी आवाज गले से नहीं

  दिल से जब आयेगी,

 दूर तलक जायेगी।

पहाड़ से टकरायेगी,

  अपने आप को दोहरायेगी, 

 और फिर कुछ इस तरह 

 चहुं ओर फैल जायेगी ।


कुछ कान लगाकर सुनेंगे 

और जरूर सुनेंगे ,

और कुछ ऐसे भी होंगे यहां 

 जो सुनने का सिर्फ नाटक ही करेंगे।

  वहां मेरी यही आवाज

 सुनकर भी अनसुनी की जायेगी ।

 मेरी आवाज गले से नहीं 

 दिल से जब आयेगी।


 जो सुनेंगे वे मंथन करेंगे,

 मंथन करके फिर गुनेंगे ।

 जो नहीं सुनेंगे तो नहीं सुनेंगे,

  वे तो अपनी ही चलायेंगे,

अपनी अलग ही दाल गलायेंगे,

 ऐसे लोगों से फिर,

 मेरी आवाज मेरे ही पास 

लौट कर फिर आयेगी ।


मेरी आवाज गले से नहीं,

 दिल से जब आयेगी ।

मेरी आवाज गले से नहीं,

 दिल से जब आयेगी।


स्वरचित--

 सतीश गुप्ता 'पोरवाल',

 मानसरोवर, जयपुर।

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