*सूरज निकला है*
घने बादलों की ओट से ,
सूरज निकला है ,
जब सूरज निकला है तो ,
ग्लेशियर भी पिघला है ।
कुछ अपनों ने वादा किया ,
बरसों-बरस हमको भरमाया,
सूरज तो छोड़ो ,
चांद भी ना दिखलाया।
हम तो बस तारों की तरह,
टिमटिमाते रहे ,
सपने दिखा दिखाकर
बस हमें भरमाते रहे ।
अब जब निकला है सूरज,
हम इसकी ताकत बढ़ाते रहें,
सभी अपनों को ,
अपना बनाते रहें।
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