बुधवार, 26 मार्च 2025

हास्य कविता - ऐसा करने दे

 चल हट हवा आने दे /हलवा पुरी खाने दे/ भैंस के आगे बीन बजाने दें/ जो जाता है उसे जादे दे/ घबराने दे /हर्जाने दे/ कल बुलाने दे /डराने दे/ बुझाने दे /हराने दे/ मनाने दे /ठिकाने दे/जलाने दे/अनजाने दे/सुहाने दे

चल हट ,परे हट, हवा आने तो दे।

 जो रोग नहीं मुझे उसकी दवा लाने तो दे।।

 कोई ऐसी वैसी ऐसी बात तो नहीं कही मैंने।

 लेकिन फिर भी बिना बात के ही पछताने तो दे।।

 अपने घर में बस दाल-रोटी ही मिलती है मुझे।

 लेकिन बनकर मेहमां हलवा पुरी खाने तो दे ।।

मैं जानता हूं मेरी इस दुनिया में कोई नहीं सुनता।

 लेकिन भाई, भैंस के आगे बीन बजाने तो दे।।

 माना कि मैं निर्भीक हूं नहीं डरता किसी से भी।

लेकिन भूत बनकर औरों को डराने तो दे।।

मैं फायर ब्रिगेड का कर्मचारी तो नहीं मेरे भाई।

लेकिन जो आग लगी नहीं उसे बुझाने तो दे।।

 पहलवान को देखकर मेरी सिट्टी-पिट्टी हो जाती है गुम।

लेकिन किसी सींकिया‌ पहलवान को हराने तो दे ।।

किसी से नहीं कोई भी गिला शिकवा मझे।

पर दिलजलों के दिल जलाने तो दे।।

कोई कितने ही गम में डूबा हो, मुझे क्या वस्ता।

 मैं तो खिलंदड़ हूं ,मुझे खिलखिलाने तो दे।।

 कहते हैं मुझे कि इंसान नहीं यह तो लगता गधा है।

  ऐसे इंसान को दो-चार दुलत्ती लगाने तो दे।। 

  समझते हैं कुछ लोग मैं गमगीन हूं, अंतर्मुखी हूं ।

 ऐसे लोगों को बहार के तराने सुनाने तो दे।। 

कुछ लोगों के चेहरे पर कोई भाव ही नजर नहीं आते। 

 ऐसे लोगों को आज तो,हास्य कविता सुनाने तो दे।।

बहुत दिनों बाद वह मिला, मैंने कहा आज कविता तो सुनाने दे।

वह बोला किसी और को सुना देना, कृपया मुझे तो जाने दे।।

Kalkkj

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