मैं इधर जाऊं, उधर जाऊं या किधर जाऊं,
समझ में आए, जब मैं कान्हा के गुण गाऊं।
न झुको,न रुको, कदम आगे ही बढ़ाना है,
गम कितने ही आएं जिंदगी में, बस मुस्कुराना है।
ये आंधी ये तूफां रोक न सकेंगे हमारे कदम,
हमने तो खाई है आगे ही आगे बढ़ने की कसम।
हौसला है गर, तो मंजिल दूर तो नहीं,
इंसा इंसा है फतह पायेगा,मजबूर तो नहीं।
हर सुबह की शाम,तो हर शाम की सुबह होती है,
यह देख किस्मत भी अपनी किस्मत पर रोती है।
मैं भी सूरज हूं, डूबता हूं और उगता भी हूं।
निराश कभी नहीं होता, जाता हूं तो आता भी हूं।
कर दिए जुदा उनके जान औ तन साथियों,
कर दिया रणबांकुरों ने ऐसा जतन साथियों।
इंसान हो,खूबसूरत हो,लेकिन मजा तो तब है जब विचार खूबसूरत हो,
मूरत तो हो, लेकिन मजा तो तब है जब इंसानियत की मूरत हो।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें