तेरे कदमों के तले ओ मां मेरे आसमां और जमीं,
तेरे आंचल सी छांव तो कहीं और से मिलती नहीं।
सर पर हों तेरे हाथ तो छत की जरूरत क्या होगी,
ए मां तेरी जैसी और ममता की मूरत क्या होगी।
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