बस दो कदम और चलते तो मंजिल मिल ही जाती,
यूं मायूसी, बेशर्मी से दिल में घर नहीं कर पाती ।
मगन रहते हैं हम और करते हैं सिर्फ धर्म की बातें,
प्रयोगिक होने को क्यों नहीं करते हम कर्म की बातें।
अज्ञान से बने रहे, लक्ष्य तो कोई तय किया नहीं,
क्या करना है , कैसे करना है निश्चित किया नहीं।
जीवन नहीं मिला है केवल जीवन जी जाने को,
जीजिविषा से अग्रसर हों सफलता पा जाने को।
डर-डर कर कदम रखने से मंजिल से दूर रह जाओगे,
फूंक फूंक कर कदम रखे तो, मंजिल तक पहुंच जाओगे।
हौसला बढ़ा कर रखिए कदम दर कदम बढ़ते जाइए,
जिस मंजिल की तलाश है, तब उसे अवश्य ही पाइये।
Mssa
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