🏵️ नव वर्ष का अभिनंदन 🏵️
गत को करें नमन ,
आगत का अभिनंदन ।
साथ रहे हैं कुछ अपने ,
कुछ अपने भी हुए पराये।
दूरी क्यों है हमसे ,
अब तक समझ न पाये।
फिर भी हम ह्रदय से
करते हैं सबको वंदन,
गत को नमन ,
आगत का अभिनंदन ।
विधाता जो था दयालु ,
क्यो हो चला था क्रूर ।
छीन ले गया अपनों को,
अपनों से बहुत ही दूर ।
फिर भी नव आशा को
ताक रहे सबके नयन,
गत को करें नमन ,
आगत का अभिनंदन ।
छोड़-छाड़ सब द्वेष-विद्वेष
नव निर्माण का आगाज करें,
मन का मैल मिटाकर
झंकृत मन का साज करें ।
काम करें सब मिलकर ऐसा
जीवन वन बन जाए उपवन,
गत को करें नमन ,
आगत का अभिनंदन।
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