आओ मनायें मकर सक्रांति ,
सर्वत्र हो शांति ही शांति।
मीठा-मीठा मीठा सा है यह त्योहार,
अच्छा हो सबका परस्पर व्यवहार।
तिल और गुड़ के बनायें लड्डू ,
खायें तानी,तनिश दीया और बिट्टू। 'तिलगुल घ्या गोड गोड बोला',
लगे जैसे वाणी में मिश्री को घोला। सभी लायें पतंग और डोर,
उड़ी धरती से बादलों की ओर।
ये पतंगे सभी को दें संदेशा,
सुख और शांति रहे हमेशा।
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