शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2024

हर शब्द में सूरत तेरी नज़र आये - कविता

 जिधर देखता हूं बस तू ही नजर आए,

 इस जहां से और कहीं से कोई खबर ना आए। 

तेरी उलझी जुल्फें जब संवर संवर जाए, 

 तेरा खुला मस्त मस्तक ही नजर आए।

देखूं जब तेरी बालियों को लगे ध्वनि यंत्र,

लगता है जैसे फूंक दिया हो वशीकरण मंत्र।

यह जो पहना है सुंदर सा हार मन को लुभाये,

 लेकिन मुझे तो तेरी सुराही सी गर्दन ही भाये।

और जो पहिना है हरी चूड़ियों संग स्वर्णिम कंगन,

लगता है इन्हीं हाथों से करोगी मेरा आलिंगन।

तू अपने होठों से मेरा नाम ले या गीत गुनगुनाए,

मुझे तो बस हर शब्द में सूरत तेरी नज़र आए।


Mssa


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