बुधवार, 23 अक्टूबर 2024

दुल्हन सी भोर - कविता

 नई नवेली दुल्हन सी भोर जब धरा पर उतर आती है,

 पीत‌ चुनर ओढ़ आती जब ,बहुत मन को भाती है।

नया उल्लास नई कामना जगाती धरा की सखियों में,

 लगता है जैसे सुरमा लगा जती है हमारी अंखियों में।

क्यों न करें हम स्वागत ऐसी नई नवेली दुल्हन का,

 जो सदा ही करे नाश हमारी कल की उलझन का।

 यूं ही नहीं हमें यह भोर सुहानी लगती है,

 हर दिन यही तो एक नई कहानी गढ़ती है।

Vhssm 

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