चारों ओर जमीं पर छाई है देखो हरियाली
मुझे को बता दे तू किसकी बनेगी घरवाली
बहका --- हो
बहका रे मन मेरा डोला रे मन मेरा
बहका कि मंच गई धूम रे
के आया सावन झूम के- 2
काली काली घटा भी देखो घिर आई
तेरे मेरे बदन को छूकर चले पुरवाई
महका --- हो
महका रे तन तेरा महका रे मन मेरा
महका के मच गई धूम रे
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