कान्हा लियो अवतार।
ऐसी मनभावन छवि पर,
मैं बलिहारी जाऊं बारंबार।
चहुं और छाई ऐसी खुशहाली,
धरती पर छाई ज्यों हरियाली।
बाट जोहते हर नर-नारी,
कब आएंगे कृष्ण मुरारी।
बागों में चिड़ियाँ चहचहाती,
कोयल भी मीठी कूक लगाती।
मेघ गरज गरज कर बरसने लागे,
सोये मन प्रफुल्लित हो जागे।
दुख दर्द सब अपने भूले,
बगिया में सखियां झूला झूले।
मुरझाए फ़ूलों पर आई बहार,
जब कान्हा लियो अवतार।
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