सोमवार, 28 अगस्त 2023

टूटा तारा- कविता

 कहीं दूर जब तारा टूटता है,   

एक रोशनी सी नजर आती है।

तेरा दंभ भी शायद टूट जाए, 

ऐसा विचार मन में उभरता है।

देखता रहता हूं टूटते तारे को, 

शायद मन की मुराद पूरी हो। 

मन्नत मांगता हूं मैं उससे, 

मेरी चाहत न अधूरी हो। 

तूने भी शायद देखा होगा,

तुझे भी तो नजर आया होगा। 

जब से तूने दूरी बना ली है, 

मैंने कितना दुख झेला होगा।

अब जो तू नजरें इनायत कर दे, 

तो मेरी जिन्दगी बन जाएगी।

 मेरी ख्वाबों की झोली,

खुशियों से भर जाएगी।

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