दूर जा रहे रुक जाओ ना कुछ पल और,
अभी तो रात गहरा रही,नहीं हुई है भोर।
ऐसी भी क्या बेरुखी क्या हुई हमसे कोई खता,
तुम्हारी यह चुप्पी बना रही है हमें कमजोर।
हर ओर उदासी का मंजर दिखाई दे रहा,
छा गई ई ज्यों आसमां पर घटा घनघोर।
हम तो थेअपने आप में ही मस्त रहने वाले,
क्यों चुरा लिया दिल हमारा,क्यों बनी चितचोर।
थोड़ी मोहलत तो दो,समझा लूं अपने दिल को,
अब तो यही फरियाद करते हैं तुमसे पुरजोर।
उदासी की मझधार में गोते लगा रहा दिल,
तू ही बता कैसे जाऊं मैं किनारे की ओर।
Mssa
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