तेरी कसम तेरा वादा,
सच है कम झूठ है ज्यादा।
ऐसी बेवफा से क्यों किया,
हमने प्यार का इरादा।
हम तो अपने में ही,
खूब खूब मस्त थे।
अपना ही कामों में,
रहते व्यस्त थे।
फिर क्यों हमने,
ऐसा झंझट पाला।
लगता है जैसे गले में,
अटक गया हो निवाला।
हम हो गए अधर झूल में,
इधर जाएं या उधर जाएं।
भटक रहे हैं इधर उधर,
आखिर जाएं तो किधर जाएं।
अंधेरे में रास्ता नजर आता नहीं,
आंखों में जैसे पड़ गया हो जाला।
अब किसकी दें दुहाई,
किसका दें हवाला।
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