मन से हमें उतार दिया यह उसका गरुर था
दिल में जगह बनाएंगे यह हमारा सुरूर था
दिन तो हमने गुजार दिए देखा उनको ख्वाब में,
न नींद आती है और न सपने हमको रात में।
दिल तो आखिर दिल जो ठहरा, धड़कता है,
धड़कनों में यादें समाकर यह दिल महकता है।
मैं तेरी राह का फूल हूं चाहे तो होठों का प्यार दे,
या फिर मुझे रास्ते का पत्थर समझ ठोकर मार दे।
आखिर कब तक यूं ही याद करके तुम्हें पुकारता रहूंगा,
इस जानी पहचानी राह पर, तेरी राह निहारता रहूंगा।
जब तू साथ थी, फिजाओं में जैसे थे फूल ही फूल,
अब तो मेरी राहों में जैसे बिखरे पड़े हैं,शूल ही शूल।
अब जब से तू मुझसे दूर हुई, रही मेरे करीब नहीं,
तेरी जुल्फों की वो ठंडी छांव मुझे नसीब नहीं।
तेरे आ जाने भर से दिल हो जाता था बाग बाग,
अब तो जैसे सीने में सुलग रही है बस आग आग।
मत कर गुमान न जाने क्या से क्या हो जाएगा,
जो सपना तू देख रही वह सपना ही रह जाएगा।
रेत के महल भी कभी लहरों से बच पाते हैं
न कर नादानी, समय के क्षण यह कह जाते हैं।
या तो जैसे गुजर रहे हैं दिन मेरे, तू भी वैसे गुजार ले
या फिर दिल को समझाकर,मुझे फिर से पुकार ले।
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