मंगलवार, 20 अगस्त 2013

* प्रतिशोध*

       * प्रतिशोध*
नभ की उंचाईयों को लांघ
आसमां के सितारे को छू लूं ,
जकड़ लूं मुट्ठी में ,कभी न छोडूं
दिल के पाटों के बीच मसल दूं।
 उतारता हूं मैं इसी पर
क्रोध सारा का सारा ,
क्योंकि बन न सका यह
मेरी किस्मत का सितारा।

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