*** पवित्र धागा और वादा***
त्यौहार आते हैं ,
चले जाते हैं
पर इनका महत्त्व है इतना,
इन्सां के सोये दायित्व को
दे जाते हैं ,ये
एक नई चेतना।
मिला मुझे और ग्रहण किया
तुम्हारे स्नेह में भीगा
भ्राता व भगिनी के बीच
अटूट प्रेम को दृढ बनाने ,
भ्राता को सर्व -संपन्न करने ,और
चतुर्मुखी उन्नति की कामना लिए
तुम्हारा पवित्र धागा।
मेरे दायित्व को
नई चेतना मिली ,
मैने जानी कच्चे धागे की मजबूती ,
भगिनी , मैं भी करता हूँ
हृदय की गहराईयों से
तुम्हारे प्रति अपना दायित्व,
निभाने का वादा।
त्यौहार आते हैं ,
चले जाते हैं
पर इनका महत्त्व है इतना,
इन्सां के सोये दायित्व को
दे जाते हैं ,ये
एक नई चेतना।
मिला मुझे और ग्रहण किया
तुम्हारे स्नेह में भीगा
भ्राता व भगिनी के बीच
अटूट प्रेम को दृढ बनाने ,
भ्राता को सर्व -संपन्न करने ,और
चतुर्मुखी उन्नति की कामना लिए
तुम्हारा पवित्र धागा।
मेरे दायित्व को
नई चेतना मिली ,
मैने जानी कच्चे धागे की मजबूती ,
भगिनी , मैं भी करता हूँ
हृदय की गहराईयों से
तुम्हारे प्रति अपना दायित्व,
निभाने का वादा।
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