SatishKumar
गुरुवार, 29 अगस्त 2013
बेपरवाह
लोग कहते हैं
मैं परवाह नहीं करता ,
दर्द तो मुझे भी होता है यारों
पर मैं आह नहीं भरता।
चोटिल तो मुझे भी करते हैं लोग
मलहम लगता हूँ मैं ,
चोट पर नश्तर घुमाने से
घाव नहीं भरता।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें