मंगलवार, 4 जुलाई 2023

दो लफ़्ज़ों में-' कविता

 ऐसे कैसे "दो लफ्जों" में बयां कर दे कोई अपनी कहानी, 

 जबकि झंझावातों गुजरते  गुजारी हो अपनी जवानी। 

 वह गुजारिश करता रहा कहता  रहा तुम्हारी राह निहारूंगा,

 उसने बस दो लफ्जो में दो टूक कह दिया "नहीं आऊंगा"। 

  बहुत कहा कि तुम ऐसा करो नहीं तो मैं मर जाऊँगा,

    बड़ा ही निष्ठुर था कह दिया कि "नहीं करूंगा"। 

  बड़ी शिद्दत से समझाया ऐसा करो न हो मगरूर,

  बड़ा ही शरीफ था दो लफ्जो में कह दिया "जी जरूर"। 

सच्चे आशिक ने प्यार का इजहार किया और पूछा "एंड यू"

 उसका प्यार भी सच्चा था और कह दिया "आइ टू"। 


Mssa/ dainik

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