शनिवार, 1 जुलाई 2023

राज ए मोहब्बत-- कविता

 राज ए मोहब्बत को राज ही रहने दो,

 दुनिया चाहे कुछ भी कहे, कहने दो।

दिल कुछ कहे ना कहे , छोड़ो भी ,

मोहब्बत आंखों से ही कर लेने दो।

 क्या होती है मोहब्बत हमें तो पता नहीं,

 कहां मिलती है यह उसका पता नहीं ।

कब होती है ,कैसे होती है यह भी पता नहीं।

 किसे होती है किसे नहीं यह भी पता नहीं। 

  कहते हैं कि मोहब्बत खुद चली आती है,

  इसे कोई करता नहीं, बस हो जाती है।

  किसी से बेशर्म होकर लिपट जाती है 

  लेकिन  किसी से कुछ-कुछ शर्माती है।

  हम तो बड़े बेपरवाह हैं इस जमाने में ,

 हमें तो नहीं उलझना किसी भी फसाने में।

 हम जैसे संगदिल भी हैं यहां पर, 

मोहब्बत को मजा आएगा इन्हें हराने में। 

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