हाथों का तकिया लगा कर,
माटी का बिछौना बिछाकर,
तुझे निंदिया लोक में ले जाऊं,
मेरा क्या बेठी-बेठी ही सो जाऊं।
मैं तो चाहूं नर्म सा ग़द्दा हो,
रुई से भरा तकिया हो,
और एक महीन सा चद्दर,
ताकि न काटे तुझे मक्खी या मच्छर।
किस्मत सबकी एक सी नहीं होती,
किसी की होती बहुत ऊंची,
कुछ दुनियां में हम जैसे हैं,
जिनकी किस्मत होती है फूटी।
दुनियां में ही हमने देखा है,
मखमली गद्दा भी नींद नहीं लाता,
लेकिन हमारा राजा बेटा,
मिट्टी में ही गहरे सो जाता।
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