शनिवार, 25 फ़रवरी 2023

मोहे रंग दे पिया - कविता

  मेरी रग रग में तुम ही समाओ,

जब भी गाओ प्रेम गीत ही गाओ।

मोहे रंग दे पिया ऐसे रंग में, 

सिहरन सी दौड़ पड़े अंग अंग में ।

पनघट पर राह निहारती सखियां,

 बात बना बनाकर करती बतियां।

     घूर घूर कर मोहे देख रही,

     खूब नचाती अपनी अखियां।

     रात रात भर राह निहारुं,

नयनों में सपने सजाऊं।

दिल में जो बीत रही है,

तुम ही बताओ कैसे सुनाऊं।

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