निडर और अडिग हो जूझ रहा,
सीना तान कर जो अड़ा रहा ।
कोशिश की जिसने भी डिगाने की,
वो धरती पर आकर पड़ा रहा ।
हर सांस में यथार्थ भरा हुआ ,
मैं सत्य अहिंसा का वादी हूं ।
सीना ही नहीं दिल भी है फौलादी,
मैं तूफानों में चलने का आदी हूं ।
दीन दुखियों का दुख न समझे,
उन लोगों की मैं बरबादी हूं l
अवरोधों की मुझे चिंता ही नहीं,
मैं मात्र हवा नहीं आंधी हूं।
कोरी कल्पनाओं पर विश्वास नहीं
प्रकृति से मैं यथार्थवादी हूं
डगमगाये नहीं कदम कभी,
मैं हौसलों से बढ़ने का आदी हूं।
स्वरचित-
सतीश गुप्ता'पोरवाल'
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