कुछ वो शब्द ,
जो जुबान पर आये।
कुछ वो शब्द,
जो जुबान पर नहीं छाये।
शब्दों का माया जाल,
बड़ा जटिल है,
कोई बनता सज्जन,
तो कोई कुटिल है।
शब्दों से चाहो तो,
पतझड़ मे बहार ला दो,
शब्दों से ही चाहो तो,
तकरार करा दो।
कुछ वो शब्द,
जो कहना चाहा,
पर कभी कह नहीं पाया।
कहने से पहले ही अनजाना सा,
डर मेरे मन में समाया।
शब्दों को माला मे पिरो कर,
कविता बना दो।
या फिर कहानी की,
सरिता बहा दो।
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