रविवार, 5 फ़रवरी 2023

पुनर्जन्म-- कविता

 कहने को तो जनम जनम का साथ है,  

 यह भी कि सात जन्मों का साथ है।

 क्या इनमें कोई सच्चाई भी है,

 या फिर बस कहने की ही बात है।

  कुछ चाहें अगले जनम में यही साथी मिले,

 कुछ तो चाहें किसी भी हाल में ना मिले।

 तो क्या चाहने से ही सब कुछ हो जाता है,

 अगले जनम में जो चाहें मिल जाता है।

 हमारे शास्त्रों में पुनर्जन्म का विधान है,

 कभी-कभी इसका मिलता प्रमाण है।  

 मैं तो चाहूं हम दोनों के ऐसे सत्कर्म हों,

हम दोनों फिर साथ हों जब पुनर्जन्म हो।

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