मंगलवार, 28 फ़रवरी 2023

चाँद तारों की महफ़िल-- कविता

 तेरे  लिये चाँद तारों की महफिल सजा दूँ,

 तू मेरे लिए क्या है यह तुझे बता दूँ ।

मुझे तो बस एक धूमकेतु की जिंदगी मिल जाये,

 दुनियां की सारी खुशियाँ तेरी झोली में भर जाये।


दुष्ट बादल तारों  को ढक  लेता है,

 तो सच में चाँद का  नूर हर लेता है।

 गम का बादल तेरी ओर न आये,

 किसी भी रूप में आकर न सताये।


 दुआ है मेरी ऊपर वाले से,

  दूर रखे तुझे दुनियां की हर बला से।

राह के कांटों को नदिया में बहा दूं,

तेरे लिये चाँद तारों की 

महफ़िल सजा दूं।

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