शुक्रवार, 3 मार्च 2023

मोहे रंग दे (संशोधित) -- कविता

         ओ श्याम, मोहे रंग दे ऐसे रंग में पिया,

        सिहरन सी दौड़े रग रग में पिया।

 मेरी रग रग में तुम ही समाओ,

  मेरे दिल में तुम बस जाओ,

  दिन तो कैसे भी गुजर जाये,

  न जाने कैसे बीत रही रतियां,

      मोहे रंग दे ऐसे रंग में पिया,

      सिहरन सी दौड़े रग रग में पिया।


    पनघट पे सखियां राह निहारे

   बात बात में बात बनाये

    घूर घूर मोहे देख रही,

    खूब नचाती अपनी अखियां।

        मोहे रंग दे ऐसे रंग में पिया, 

        सिहरन सी दौड़े रग-रग में पिया।


     रात रात भर राह निहारुं,

     नयनों में सपने सजाऊं।

     दिल में जो बीत रही है,

     फिर कैसे जाये जिया। 

         मोहे रंग दे ऐसे रंग में पिया,

        सिहरन सी दौड़े रग रग में पिया।


स्वरचित--

 सतीश गुप्ता'पोरवाल',जयपुर।

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