मंगलवार, 28 मार्च 2023

ऐसी ग़ज़ल लिखूं - ग़ज़ल


सोचता हूं मैं कोई ऐसी गजल लिखूं,

 कोई गफलत भी ना हो ऐसी सरल लिखूं। 

पड़ गया है सूखा चाहे मेरी चाहतों पर,

 पर तुझे तो लहलहाती फसल लिखूं। 

 झोपड़ी में रहने की हो चाहे  कुव्वत मेरी, 

 पर तुझे तो मैं एक आलीशान महल लिखूं। 

 कितना भी उलझ जाऊँ दुनिया की उलझनों में,

 पर तुझे तो हर उलझन का हल लिखूं।

 सूखी नदी में भी नहाना नसीब न हो मुझे,

 पर तुझे तो शिवजी पर चढ़ता हुआ जल लिखूं।

मैं तो हूं एक मुरझाया हुआ सा फूल,

पर तुझे तो सरोवर में खिलता कमल लिखूं । 

अब कुछ भी नहीं बचा मेरी जिंदगी में 

 पर तुझे तो जिंदगी की पहल लिखूं। 

 टूट गया,बिखर गया,कुछ कर न सका,

  पर तुझे तो हर काम का अमल लिखूं।

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