शनिवार, 25 मार्च 2023

आधुनिक बहू- कहानी

 कृष्ण कुमार जी और उनकी पत्नी शांति जी, दोनों ही खुश थे।।खुश होते भी क्यों नहीं  जैसा सोचा था, घर में ऐसी बहू आ रही थी ।पढ़ी-लिखी इंजीनियर ,एक कंपनी में अच्छा वेतन पाने वाली। उन्होंने सोचा, जब बेटा-बहू दोनों की कमाई घर में आएगी तो दरिद्रता दूर होगी, इसी घर में एक मंजिल और बना लेंगे ताकि बेटा-बहू को किसी तरह की कोई तकलीफ ना हो। शादी हो जाने के बाद बेटा -बहु दोनों सुबह तैयार होकर अपनी अपनी कंपनी में जाते। बहू के फैशनेबल कपड़े पहनने से उनको कोफ्त तो होती लेकिन बर्दाश्त करते रहे । सुबह की चाय तो बहू बना लेती लेकिन नाश्ता और खाना शांति जी को ही बनाना पड़ता । कुछ दिन तो सामान्य रूप से गुज़रते गये लेकिन धीरे-धीरे यह दिनचर्या शांति जी को भारी लगने लगी। कालांतर में घर में पोता भी आ गया उसे संभालने की जिम्मेदारी भी कृष्ण कुमार जी और शांति जी की हो गई। दोनों को लगने लगा कि हम जैसे माता-पिता नहीं नौकर चाकर हो गए।  यह विचार और सुदृढ़ हो गया जब बेटे बहू ने अलग मकान खरीद कर बाहर जाने का उनको कहा। कृष्ण कुमार और शांति जी को लगा की  आधुनिक, पढ़ी-लिखी, नौकरी करने वालीं बहू को लेकर उनका जो सपना था वह टूटने की कगार पर आ गया था।

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