भूली हुई उन कहानियों में मेरा अक्स नजर आएगा,
गुमशुदा है जो इस जहां से वह शख्स नजर आएगा।
तारे गिन गिन कर भी गुजारे न गुजरता था,
नजर डालोगे तो तुम्हें वह वक्त नजर आएगा।
इस जहां से तो हमने कुछ मांगा नहीं था,
जहां से मैं चला था फिर देखा तो वहीं था।
कहते थे लोग गलत राह पर चल दिए,
पर मैं मानता हूं कि मैं सही था।
भूली हुई वे कहानियां फिर से उभर आती हैं,
जाता हूं मैं जिधर उधर ही चली आती हैं।
कहानियों से रिश्ता ही ऐसा जुड़ चुका है मेरा,
कि मुझे ये कहानियां जिंदगी की तरह भाती हैं।
जिंदगी में आखिर कहानियां कौन बनाता है,
नहीं बनती जैसी कोई बनाना चाहता है।
कुछ कहानियां बनती हैं जिन्हें भूल जाएं,
कुछ ऐसी भी जिन्हें याद रखना चाहता है।
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