शुक्रवार, 24 मार्च 2023

वफा-बेवफा-- ग़ज़ल

 हम उनसे नजरें मिलाते रहे करते रहे वफा,

 एक नजर क्या चुराई तो हम हो गए बेवफा।

 बात क्या है आखिर हमें भी बताओ,

 या यूं बेवजह ही हो गए हो खफा।

 चेहरे तक लटकती जुल्फें लगती थी खूबसूरत,

 आखिर तुमने उसे क्यों दिया हटा।

 ऐसी भी क्या नाराजगी क्यूँ बेजार करती हो

  किस बात की हमें देना चाहती हो सज़ा। 

   क्या तुम चाहती हो यह तो बताओ,

  क्या मेरी रजा में नहीं है तुम्हारी रजा।

  मेरी जिंदगी में तुम्हारी जिंदगी मिला दो,

 फिर देखो आ जाएगा जिंदगी जीने का मजा।

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