हां,आज भी मै लिखने जा रहा हूं एक कविता,
मन में भावों की कल कल बहने लगी थी सरिता।
वैसे तो अमूमन रोज ही मैं कविता लिखता रहता हूं,
विश्व कविता दिवस पर आज भी लिखने की सोचता हूं।
समझ नहीं पा रहा था कि आखिर लिखूं तो क्या लिखूं,
कभी सोचा हास्य लिखूं तो कभी सोचा शृंगार लिखूं ।
वैसे तो वीर रस की कविता भी मुझे लुभाती है,
रोजमर्रा की जिंदगी पर लिखी कविता भी मुझे भाती है।
कई तरह के भावों में आखिर ठन ही गई,
और मुझे लगता है एक कविता बन ही गई।
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