गुरुवार, 23 मार्च 2023

पुराने ज़ख़्म- कविता

पुराने ज़ख्म  हर जख्म को हरा कर देते हैं,

 वे कौन है जो हर ज़ख्म को जवां कर देते हैं।

 अक्सर लोग पुराने ज़ख्मों को गहराई में डुबो देते हैं,

लेकिन कुछ लोग आकर फिर से नश्तर चुभो देते हैं।

 जीवन इंसान का दुनियां में कुछ ऐसा ही होता है,

   पग पग  पर उसे दुखों का सामना करना पड़ता है।

  दुख जब असहनीय हो जाए तो जैसे ज़ख़्म बन जाता है, 

 और दिल को कुतरने वाला पीड़ा का कीड़ा बन जाता है। 

 आप तो ज़ख्म पर चाहे मलहम लगा लेते हैं, 

  लेकिन कुछ लोग उस पर नमक लगा देते हैं।

 ज़ख्मों के निशां सारी हालत बयां कर देते हैं,

  पुराने ज़ख्म हर ज़ख्म को हरा कर देते हैं।

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