सोच तो यह है की हर ख्वाहिश पूरी हो,
कोई भी ख्वाहिश ऐसी ना हो जो अधूरी हो।
इतनी पास आ जाएं वे सब हमारे,
उनके और हमारे बीच कोई दूरी न हो।
जीवन में ख्वाबों की माला बनाते रहें,
जो दिल को सुकून दे ऐसे सपने सजाते रहें।
हां गमों के जंजालों से मीलों दूर होकर ,
खुशियों के साज ही बजाते रहें।
कोई पल भी ऐसा ना आए कभी,
कि हम ख्वाहिश करना ही छोड़ दें।
जो तार से तार जोड़ा उसे बीच में ही छोड़,
चलो गमो से नाता तोड़ खुशियों से जोड़ दें।
स्वरचित- सतीश गुप्ता पोरवाल
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