शुक्रवार, 17 मार्च 2023

काला पति- हास्य कविता

 यह क्या बात कर दी आपने भईया जी,हाय रब्बा,

 मेरा पति कतरा नहीं काले पेंट का है पूरा डब्बा।

मैं भी थी बहुत नखराली लेकिन दिमाग वाली, 

 क्या हुआ जो मैं हूं गोरी और नहीं काली। 

 चलो मैं बता देती हूं मेरा अपना किस्सा,

मेरे पति की संपत्ति में मेरा है बड़ा हिस्सा।

 धन-धान्य से भरा रहता है पूरा घड़ा,

 और बैंक में है उसका लॉकर सबसे बड़ा।

 तुम ही बताओ गोरे पति को क्या चाटूं

  देश विदेश में नहीं घूमें तो क्या घर में बैठूं।

  वह काली कमाई भी अच्छी भली कर लेते हैं,

  दूसरों का माल अपना बनाकर घर भर लेते हैं। 

आपने आखिर क्यों मुझ बाला को घेरा है,

  मेरा पति जैसा भी है,बस मेरा है।

  दुनियां के कुछ भी कहने से कुछ भी नहीं होना है,

  मेरा पति ऐसा-वैसा नहीं, खालिस काला सोना है। 

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