किसी भी मोहल्ले में भांति भांति के लोग रहते हैं। किसी का मिजाज नरम तो किसी का गरम। शर्मा जी और वर्मा जी का परिवार आमने-सामने रहता था, कभी-कभी उनमें आपसी नोकझोंक किसी न किसी बात पर हो जाती थी। एक बार यह नोकझोंक इतनी आगे बढ़ी कि वह झगड़े में परिवर्तित हो गई। पुरुषों से शुरू हुआ झगड़ा स्त्रियों तक पहुंच गया था। झगड़े के बीच ही शर्मा जी ने मिसेज वर्मा को कह दिया कि तुम आग लगाने आ गई हो।मिसेज वर्मा और आग बबूला हो गई और खूब खरी-खोटी सुनाने लगी।
अगले ही माह होली का त्यौहार आ गया। होलिका दहन के लिए होली सजाई गई। मोहल्ले के सभी स्त्रियों ने वहां पूजा अर्चना की।इसके पश्चात शुभ मुहूर्त में होलिका को अग्नि दी गई । फिर होलिका की परिक्रमा की जा रही थी कि अचानक मिसेज वर्मा की साड़ी ने आग पकड़ ली। शर्मा जी की निगाह सबसे पहले उस पर पड़ी और वे तुरंत दौड़कर उनकी साड़ी खींचकर आग बुझाने लगे। जैसे ही वर्मा जी ने देखा वे आग बबूला होकर दौड़े और शर्मा जी को धक्का दे दिया। लेकिन जब उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी की साड़ी ने आग पकड़ ली थी और शर्मा जी ने तो आकर उसको बुझाया यदि वे वैसा ना करते तो बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। उन्हें पश्चाताप हुआ और जाकर शर्मा जी से माफी मांगी और उनके गले लग गए। फिर बोले मुझे माफ करना तुमने पड़ोसी का धर्म निभाया है । हमें अच्छे पड़ोसी की तरह रहना चाहिए, पुराने गिले शिकवे सब भुलाकर नए रिश्ते निभाना है। वहां पर उपस्थित सभी जनों ने ताली बजाकर इस नए रिश्ते का स्वागत किया।
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