सोमवार, 20 मार्च 2023

गुरू से ज्ञान --कविता

 अज्ञानता के अंधेरे में विचरण कर रहा था, 

  बिना पतवार के ही मैं नाव खे रहा था। 

 अब जब मुझे गुरु मिले तो ज्ञान पाया,

 दुनियादारी गुरु की संगत से ही जान पाया। 

 कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अंधेरे में रोशनी ढूंढते हैं,

 लेकिन असफल होकर किंकर्तव्यविमूढ़ से रहते हैं।

 कुछ लोग दुनियादारी को समझ नहीं पाते हैं,

 सिर्फ अपने रास्ते आते हैं अपने रास्ते जाते हैं।

  अल्प बुद्धि से ही अपने आप को समझदार समझते हैं,

  उनको जो करना होता है बस वही करते रहते हैं। 

 किसके साथ कैसा व्यवहार करना है नहीं जानते हैं,

 अपनों को पराया और परायों को अपना मानते हैं ।

 गुरु की संगत में जाएंगे तभी ज्ञान को पाएंगे,

 और तभी दुनिया में दुनियादारी को समझ पाएंगे।

 याद रहे हम सबको,गुरु ही ज्ञान की खान है ,

 गुरु को मान देना ही स्वयं अपना मान है।

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