SatishKumar
शुक्रवार, 31 मार्च 2023
पल भर में बिखर जाते हैं जन्मों के रिश्ते ,
राम करे मिलके ना बिछड़े कोई भी ऐसे।
वादे किये थे जिंदगी भर साथ निभाने को,
बुने थे जो सपनों के चादर बन गए है रेशे।
गृह नक्षत्र भी मिल जाते
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें