मंगलवार, 14 मार्च 2023

भेड़ और भेड़िया-- कहानी

 एक जंगल में भेड़ियों का एक समूह विचरण करता था,उसी जंगल में एक भेड़िया भी था। उसकी निगाह इन भेड़ों पर थी और यदा कदा मौका देख कर जैसे ही अकेली भेड़ दिखाई देती उस पर झपटता  और खा जाता।वे बहुत सहमी हुई थीं, उन्होंने भेड़िए को समझाने की कोशिश की लेकिन उसको कोई असर नहीं हुआ। लाचार होकर उनको भेड़िए के घर के सामने धरना देना पड़ा। यह वह घर था जो सूना पड़ा हुआ था और भेड़िए ने वहां अपना बसेरा बना लिया था। भेड़िए को सबक सिखाने  को भेड़े इकट्ठे होकर दरवाजों पर धक्का देने लगीं। भेड़िया घबरा गया और उसने अपने मित्र सियार को बुलाया और सहायता करने को बोला। सियार ने देखा कि उस पुराने घर में कुछ लकड़ी और कीलें पड़ी हुई थीं ,पास में एक हथौड़ी भी थी। उसने   कीलों के माध्यम से लकड़ी के बड़े टुकड़े दरवाजे पर ठोक दिए और कहा कि अब तुझे कोई खतरा नहीं है। भीड़ भी कम नहीं थी उन्होंने खिड़की पर आकर भेड़िए को कहा कि तुम कहां तक बचोगे ,हमारे साथ जंगल की और भी जानवर आएंगे। हाथी भी आएगा और तुम्हारे दरवाजे को   तोड़कर तुम्हें मार डालेगा। यह सुनकर भेड़िया घबरा गया और हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा।  उसने कहा कि मैं आगे से तुम लोगों पर हमला नहीं करूंगा,तुम निश्चिंत होकर जंगल में विचरण कर सकते हो ।

 भेड़िए की माफी के साथ ही मामला समाप्त हो गया।

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