#विषय : मां
*मां मेरी मां*
मां,मेरी मां, तू ही मां तू ही आया,
सारा जग तुझ में ही समाया।
न जाने कहां पर था मैं,
इस दुनिया से था अनजान।
मां तूने ही तो डाली थी,
मेरी काया में जान।
मां मेरी मां तुम ही मां तू ही आया,
सारा जग तुझमें ही समाया।
इस दुनिया में जब मैं आया,
सामने बस तुझको ही पाया।
कितने-कितने कष्ट उठाकर,
मां तूने मुझको जन्माया।
मां मेरी मां तू मां तू ही आया,
सारा जग बस तुझमें ही समाया।
मेरा मुंह देख कर देख कर,
तू कितना हर्षाती थी।
जब भी मुझको रोना आता,
तुरंत दौड़ कर आती थी।
मां मेरी मां तू ही मां तू ही आया,
सारा जग बस तुझमें ही समाया ।
जब कभी मैं राह भटकता,
तूने ही राह दिखाई।
जब आई कठिनाई,
माँ तेरी याद आई।
मां मेरी मां तू ही मां तू ही आया ,
सारा जग बस तुझमें ही समाया ।
स्वरचित- सतीश गुप्ता'पोरवाल',जयपुर।
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