शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2023

विवेकशीलता -- कविता


विवेक का इस्तेमाल करना प्रवत्ति में नहीं,

विवेक शीलता कहीं खो रही है।

मानव में मानवता की नितान्त कमी है,

मानवता तो कहीं सो रही है।


आ तो गये हैं इस दुनियां में,

मालूम नहीं आकर करना क्या है।

पोथियों के तो ढेर कर लिये

मालूम नहीं पढना और लिखना क्या है।


विवेक और धैर्य की नितान्त है कमी,

अल्प बुद्धी से समझता अपने को महान है।

दिखावा कितना भी करले जीवन में, 

पर वास्तविकता में वह कितना नादान है।


सफलता की चाह आखिर किसे नहीं होती,

सफलता का सूत्र कोई आसमान से नहीं टपकता।

विवेक अपनाकर विवेकशील गर हो गये,

वही व्यक्ति दुनिया में समझदार बनता।



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