बुधवार, 22 फ़रवरी 2023

तूफानों में- - - कविता

 हर सांस में यथार्थ भरा हुआ ,         

मैं सत्य अहिंसा का वादी हूं ।

सीना ही नहीं दिल भी है फौलादी,

  मैं तूफानों में चलने का आदी हूं ।


 दीन दुखियों का दुख न समझे, 

 उन लोगों की मैं बरबादी हूं l

 अवरोधों की मुझे चिंता ही नहीं, 

 मैं तूफानों में चलने का आदी हूं।


 कोरी कल्पनाओं पर विश्वास नहीं 

 प्रकृति से मैं यथार्थवादी हूं 

 डगमगा न सके कोई मुझे,

 मैं तूफानों में चलने का आदी हूं।


स्वरचित-

सतीश गुप्ता'पोरवाल'

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