वार न करना भूल कर भी
यकीन की दीवारों पे।
शक होना स्वाभाविक है,
छिपे हुए हथियारों पे ।
आखिर यकीन करें तो किस पर,
यहां घात करने को तैयार बैठे हैं
अपने स्वार्थ लोलुपता के चलते,
अपनों पर ही वार करने को तैयार बैठे हैं।
यकीन की दीवारें तड़क न जाएं कभी,
इनको हम मजबूती प्रदान करें।
यकीन शब्द पर यकीन करें सब,
अब तो ऐसा कोई समाधान करें।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें