शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

पोरवाल समाज की पहिचान(2)

*पोरवाल समाज की पहिचान (2)*

 आम धारणा है कि "पोरवाल समाज दर्पण" पत्रिका के सम्मानित सदस्य या तो पत्रिका को देखते नहीं , देखते हैं तो पढ़ते नहीं , पढ़ते हैं तो सोचते नहीं , सोचते हैं तो अपने विचार प्रकट नहीं करते और विचार कर भी लें तो अमल में नहीं लाते । गतांक में पत्रिका में दिए गए इसी शीर्षक से लेख पर कुछ ही प्रबुद्ध पाठकों ने  लेख में प्रकट किए गए विचारों की प्रशंसा करते हुए अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी -  भोपाल से श्रीमती साधना गंगराड़े और श्री एम एल गुप्ता इंदौर से श्री सतीश गुप्ता कोटा से श्री प्रमोद गुप्ता , रावतभाटा से हर्षवर्धन गुप्ता एवं जयपुर से श्री विनोद जैन - इन सभी का आभार एवं धन्यवाद । अब आगे - - -
 
  मैं जानता हूं की लगभग सभी स्थानों पर कुछ लोग अपने नाम के साथ पोरवाल लगाते हैं लेकिन यदि इनकी संख्या देखी जाये तो 50 से100 तक सिमट जाएगी ( ऐसे सभी बन्धु प्रशंसा  एवं बधाई के पात्र हैं ) । मैं चाहता हूं कि सभी लोग बोलचाल /पत्राचार में, विजिटिंग कार्ड , फेसबुक, व्हाट्सएप पर अपने नाम में गुप्ता  ,जैन (एवं अन्य) के आगे पोरवाल अवश्य जोड़ें। इसे एक मुहीम / आंदोलन का रूप दें ।

यदि उपरोक्त अनुसार हम अपने  कदम बढ़ा चुके हैं तो बहुत अच्छी बात है लेकिन, यह मात्र आरंभ है, इसे इति ना समझें । समाज की पहिचान बनाने के लिए हमें बहुत कुछ करना होगा हम इतने संपन्न नहीं हैं कि हमारे समाज के स्कूल कॉलेज धर्मशाला मंदिर आदि हो जोकि समाज की पहिचान के लिए मील का पत्थर साबित होते हैं । आइए हम देखें ऐसी कौन सी कमियां है जिनकी वजह से हमारे समाज की पहिचान नहीं बन पा रही है ।
शिक्षा के क्षेत्र में देखें तो हम पाते हैं कि हमारे समाज का कोई स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय नहीं है और ना ही कोई राष्ट्रीय स्तर का शिक्षाविद है ।
प्रशासनिक क्षेत्र की बात करें तो एकमात्र जिलाधीश के स्तर पर श्रीमान एल सी गुप्ता साहब रहे। एक लंबे अरसे के बाद दो या तीन व्यक्ति IAS बने , फिर बारां से सागर गुप्ता और पिछले वर्ष सवाई माधोपुर से एक साथ 4 अभ्यर्थियों ने IAS परीक्षा पास की । इस बीच तो लगभग शुन्य ही रहा । और आगे बढ़ें तो हम पाते हैं कि कविता ,गीत, संगीत, गायन, न्रत्य , खेल , फिल्म क्षेत्र में कोई कलाकार , कोई  उद्यमी , व्यवसायी,MLA , या मंत्री -- कोई नजर नहीं आता ।   
जैसा कि पहले जिक्र हुअा कि सवाई माधोपुर क्षेत्र से 4 अभ्यर्थी एक साथ IAS बने , यह मात्र संयोग नहीं है , यह योग है -- अभ्यर्थियों की मेहनत एवं स्थानीय पोरवाल समाज के योगदान का (संसाधन उपलब्ध कराये - कोचिंग व रहने आदि की व्यवस्था करके अपना योगदान दिया ) , परिणाम स्वरूप सफलता मिली । क्या सभी स्थानों के समाज इस तरह की व्यवस्था करते हैं ? कभी किसी क्षेत्र में मार्गदर्शन देने की कोई व्यवस्था की है ?  इसी तरह खेल के क्षेत्र में समाज में देखें तो , इंदौर की सृष्टि गुप्ता बैडमिंटन के खेल में निरंतर सफलता प्राप्त कर कई पुरस्कार बटोर चुकी है , साथ ही  जयपुर की प्रिशा गुप्ता इस ओर अग्रसर है ।ये दोनों ही हैदराबाद एवं.बैंगलोर में बैडमिंटन अकैडमी से कोचिंग प्राप्त कर रही हैं ,अपने परिवार के बलबूते । समाज सहयोग करे तो विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिभाओं को तलाश कर उन्हें तराशा जाये तो ये लोग परिवार ही नहीं वरन् समाज का भी नाम रोशन करेंगे  और समाज की पहिचान में योगदान दे पाएंगे ।  व्यक्ति मिलकर समाज बनाते हैं और समाज व्यक्ति को विशेष बनाता है । इस दिशा में बहुत कुछ करने की आवश्यकता है और हमें करना चाहिए । यदि हम चाहते हैं कि हमारे समाज की पहिचान उसी तरह की हो, जिस तरह की  अन्य समाजों की है तो  सभी स्थानों के पोरवाल समाज के पदाधिकारियों एवं अखिल भारतीय पोरवाल समाज के पदाधिकारियों को कार्य योजना बनाकर , ठोस निर्णय लेते हुए, इन योजनाओं पर अमल करने का निश्चय करना चाहिये ।


   

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