श्मशान है जीवन मेरा
शमशान सी नीरवता है मुझमें
मौन उदासी की तपस्या में
घुट घुट कर में यूं ही जी रहा हूं,
जुग भी न गिने थे मैंने
क्षण क्षण अब गिनकर
जीवन के चिथड़े सी रहा हूं ।
कोहरा मुसीबत का क्यों छाया है मुझ पर
मैं तो जीवन में ज्योति जला रहा था ,
ज्योति जलाकर जीवन में अपने
पथ पर उजाला मैं कर रहा था।
चक्र समय का चला तभी से
मेरे जीवन का आनंद भंग हुआ,
सुख के साथी छूटे सब
दुख एक साथी संग हुआ ।
तारे झिलमिलाते रहे गगन में
मैं घुटता रहा अपने ही मन में,
बादल जो छाये बिजली जो चमकी
तो मुझको सुध आई इस तन की ।
हां श्मशान नहीं है जीवन मेरा
श्मशान तो मृत्यु है मेरी ,
उजाला है यहां चेतना का
रातें नहीं अज्ञान की अंधेरी ।
कोहरा जो छाया समय का मुझ पर
चुप क्यों हूं मिटा इसे दूं ,
जूझ पड़ूं जीवन से अपने
ज्योति जीवन में अपने जला दूं।
शमशान सी नीरवता है मुझमें
मौन उदासी की तपस्या में
घुट घुट कर में यूं ही जी रहा हूं,
जुग भी न गिने थे मैंने
क्षण क्षण अब गिनकर
जीवन के चिथड़े सी रहा हूं ।
कोहरा मुसीबत का क्यों छाया है मुझ पर
मैं तो जीवन में ज्योति जला रहा था ,
ज्योति जलाकर जीवन में अपने
पथ पर उजाला मैं कर रहा था।
चक्र समय का चला तभी से
मेरे जीवन का आनंद भंग हुआ,
सुख के साथी छूटे सब
दुख एक साथी संग हुआ ।
तारे झिलमिलाते रहे गगन में
मैं घुटता रहा अपने ही मन में,
बादल जो छाये बिजली जो चमकी
तो मुझको सुध आई इस तन की ।
हां श्मशान नहीं है जीवन मेरा
श्मशान तो मृत्यु है मेरी ,
उजाला है यहां चेतना का
रातें नहीं अज्ञान की अंधेरी ।
कोहरा जो छाया समय का मुझ पर
चुप क्यों हूं मिटा इसे दूं ,
जूझ पड़ूं जीवन से अपने
ज्योति जीवन में अपने जला दूं।
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