शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

प्रतिशोध

आसमां में लाखों सितारे ,
एक सितारा तो मेरा होता।
 तो यूं ही नाकारा ना होकर, 
 कुछ न कुछ तो जरूर होता।
 न मालूम मेरी किस्मत का सितारा,
 मुझसे इस तरह क्यों रूठा।
  क्या मेरी ही कुंडली में,
  राहु या केतु आ बैठा ।
 नभ की ऊंचाइयों को लांघ
 आसमांं के सितारे को छू लूं ,
जकड़ लूं मुट्ठी में कभी न छोडू़
दिल के पाटों के बीच उसे मसल दूं ।
उतारता हूं मैं इसी पर
क्रोध सारा का सारा,
 क्योंकि बन न सका यह
मेरी किस्मत का सितारा।

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