आसमां में लाखों सितारे ,
एक सितारा तो मेरा होता।
तो यूं ही नाकारा ना होकर,
कुछ न कुछ तो जरूर होता।
न मालूम मेरी किस्मत का सितारा,
मुझसे इस तरह क्यों रूठा।
क्या मेरी ही कुंडली में,
राहु या केतु आ बैठा ।
नभ की ऊंचाइयों को लांघ
आसमांं के सितारे को छू लूं ,
जकड़ लूं मुट्ठी में कभी न छोडू़
दिल के पाटों के बीच उसे मसल दूं ।
उतारता हूं मैं इसी पर
क्रोध सारा का सारा,
क्योंकि बन न सका यह
मेरी किस्मत का सितारा।
जकड़ लूं मुट्ठी में कभी न छोडू़
दिल के पाटों के बीच उसे मसल दूं ।
उतारता हूं मैं इसी पर
क्रोध सारा का सारा,
क्योंकि बन न सका यह
मेरी किस्मत का सितारा।
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